₹29,000 करोड़ रुपय से लेकर ₹4,000 करोड रुपए तक गिरी अनअकैडमी जाने जानकारी

Published On: December 14, 2025
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तो नमस्कार दोस्तों आप सभी का स्वागत है हमारे आज के इस आर्टिकल में आज के इस आर्टिकल में हम बात करने वाले हैं अनअकैडमी के बारे में तो दोस्तों जैसा कि आप सभी जानते हैं कि भारत की जानी-मानी अटैक कंपनी Unacademy एक समय पर 29000 करोड रुपए की वैल्यूएशन पर खड़ी हुई थी लेकिन दोस्तों अब इसकी कीमत घटकर करीब 4000 करोड रुपए ही रह गई है हाल ही में कंपनी के दो फाउंडर गोपाल कृष्ण मुंजाल ने साफ कहा है कि कंपनी को बेचने के ऑप्शन पर भी विचार कर जा रहा है यह बयान सामने आते ही स्टार्टअप और एडिटिंग इंडस्ट्री में हलचल मच गई है Byjun के बाद अनअकैडमी दूसरी बड़ी Edtech कंपनी बन गई थी जिसकी वैल्यू इतनी तेजी से गिरी की कई इन्वेस्टर की पसंद रही है कंपनी आज अपने सामने सब के मुश्किल दौर से गुजर रही है।

Unacademy का सफर और तेजी से बड़ी वैल्यू

अनअकैडमी की शुरुआत एक ऑनलाइन पढ़ाई के प्लेटफार्म के रूप में ही शुरू हुई थी जिसे खासकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच में तेजी से अपनी पहचान बनाई कोविद के समय जब स्कूल और कोचिंग बंद पड़े थे तब ऑनलाइन एजुकेशन की मांग काफी ज्यादा बढ़ गई थी इसी दौर में Unacademy की ग्रोथ काफी ज्यादा तेजी से हुई और बड़ी निवेश कौन है इसमें जमकर पैसा इन्वेस्ट कर खुशी सालों में कंपनी की वैल्यूएशन 29,000 करोड रुपए तक पहुंच गई हर तरफ अनअकैडमी को edtech का भविष्य बताए जाने लगा था और कंपनी ने कई छोटी कोचिंग और प्लेटफॉर्म्स भी खरीदे।

फिर अचानक क्यों गिर गई कंपनी की कीमत

तो दोस्तों कोविद-19 के बाद जैसे ही ऑफलाइन कोचिंग फिर से शुरू हुई ऑनलाइन पढ़ाई की मांग हल्के हल्के कम होने लगी छात्रों और अभिभावकों ने फिर से क्लासरूम में पढ़ाई को करना शुरू कर दिया इससे अनअकैडमी जैसे प्लेटफार्म की कमाई पर काफी ज्यादा बड़ा असर पड़ा वहीं पर दूसरी तरफ खर्च लगातार बढ़ता गया बड़े टीचर पैकेज मार्केटिंग और ऑफिस खर्चे में कंपनी पर काफी ज्यादा दबाव बना दिया था निवेश को ने जब मुनाफा ना दिखा तो उन्होंने नए फंड देने से दूरी बना ली नतीजा यह हुआ की कंपनी की वैल्यू एकदम तेजी से नीचे गिरने लगी।

को-फाउंडर मुंजाल का बयान क्यों अहम है?

तो दोस्तों गोपाल कृष्ण मुंजाल का यह कहना है कि कंपनी को बेचने पर विचार अभी हो रहा है इस बात का संकेत है की हालत काफी ज्यादा गंभीर है या फिर हो सकते हैं आमतौर पर फाउंडर तब ऐसा बयान देते हैं जब कंपनी के पास कुछ ही जीने चुने ऑप्शंस बचते हैं इसका मतलब यह नहीं है कि कंपनी बंद हो जाएगी लेकिन यह साफ है कि अनअकैडमी अब अकेले आगे बढ़ाने की स्थिति में नहीं रही है हो सकता है कि कोई बड़ी कंपनी इसे खरीद ले या फिर किसी दूसरे Edtech या फिर टेक कंपनी के साथ इसका मर्ज हो जाए यह बयान निवेशकों को और कर्मचारी दोनों के लिए चिंता बढ़ने वाला है।

Byju’s के बाद दूसरी बड़ी ऐड टेक गिरावट

Byju’s पहले से ही भारी कर्ज में और कानूनी मामलों और वैल्यू में गिरावट से जूझ रही है अब अनअकैडमी की हालात ने यह साफ कर दिया है कि ऐड टैक्स सेक्टर की चमक फाई की पड़ रही है एक समय जिसे भविष्य का सबसे बड़ा सेक्टर माना जा रहा था वही आज काफी ज्यादा मुसीबत के साथ गिरा हुआ दिख रहा है निवेशकों को अब यह समझ नहीं आ रहा है कि सिर्फ ग्रोथ दिखाना काफी नहीं है कि मुनाफा और टिकाऊ मॉडल भी जरूरी है अनअकैडमी और Byju’s दोनों के उदाहरण ने पूरे स्टार्टअप सिस्टम को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

कर्मचारी और छात्रों पर क्या असर पड़ने वाला है

तो दोस्तों जब भी किसी कंपनी की वैल्यू गिरती है और उसकी बिक्री की बात होती है तो सबसे पहले असर कर्मचारियों पर पड़ता है अनअकैडमी पहले ही कई बार चटनी कर चुकी है और आगे भी नौकरियों पर खतरा बना रह सकता है वहीं छात्रों के मन में भी सवाल उठने लगे हैं की प्लेटफार्म का भविष्य क्या होगा हालांकि फिलहाल पढ़ाई और क्लासेस पर कोई भी सीधा असर नहीं दिख रहा है लेकिन डर का माहौल जरूर बन गया है अगर कंपनी बिकती है तो उसके मॉडल और सेवाओं में बदलाव संभव हो सकते हैं।

Edtech मैं निवेशकों का भरोसा क्यों डगमगाया?

पिछले कुछ सालों में निवेश कौन है एजुकेशन कंपनियों में बिना ज्यादा सोच समझ ही काफी ज्यादा मात्रा में भारी पैसा लगाया उन्होंने यह सोचा कि ऑनलाइन पढ़ाई कर दो और हमेशा चलता रहेगा और यह फैक्टर हमेशा तेजी से ही मर्फा देगा लेकिन जब ग्रोथ उनकी धीमी पड़ने लगी और कमाई उम्मीद के मुताबिक नहीं आई तो निवेशकों का भरोसा हिलने लगा, अनअकैडमी के मामले में भी यही हुआ कि जब लगातार खर्च बढ़ता गया और मुनाफा नहीं दिख तो निवेश को ने दूरी बना ली फंडिंग रुकते ही कंपनी की वैल्यू नीचे आ गई अब निवेदक सिर्फ नाम और यूजर संख्या नहीं बल्कि अब साफ कमाई और टिकाऊ मॉडल भी देखना पसंद करते हैं।

Edtech सेक्टर के लिए क्या सबक है?

तो दोस्तों Unacademy की गिरती वैल्यू यह सिखाती है कि किसी भी सेक्टर में सिर्फ तेजी से बढ़ता ही काफी नहीं होता है लंबे समय तक के रहना उसी को मजबूत बिजनेस मॉडल कहते हैं कम खर्च और स्थिर कमाई जरूरी है एडिटर कंपनियों को अब यह समझना होगा कि छात्रों की ज़रूरतें बदल रही है और उन्हें उसी हिसाब से खुद को भी ढालना होगा ऑफलाइन और ऑनलाइन पढ़ाई का संतुलन बनाना शायद आगे का रास्ता हो सकता है।

निष्कर्ष

29000 करोड रुपए से लेकर 4000 करोड रुपए तक पहुंची अनअकैडमी की कहानी सिर्फ एक कंपनी के गिरावट नहीं है बल्कि पूरे एजुकेशन सेक्टर के लिए चेतावनी है बीजू’एस के बाद अनअकैडमी का संघर्ष दिखता है कि स्टार्टअप की दुनिया में हालत कितनी जल्दी बदल सकते हैं आने वाले समय में यह देखना काफी ज्यादा दिलचस्प होगा कि अनअकैडमी खुद को कैसे संभाल पाती है या फिर किसी बड़ी कंपनी का हिस्सा बन जाती है फिलहाल इतना साफ है कि एजुकेशन सेक्टर और पहले जैसा आसान और चमकदार तो नहीं रहा।

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