तो दोस्तों मेक्सिको सरकार के एक बड़े डिसीजन में एक्सपोर्ट सेक्टर में काफी ज्यादा हलचल मचा दी है मेक्सिको ने इंडिया से आने वाले कुछ प्रोडक्ट्स पर सीधा 50% का टैरिफ लगा दिया है इसका सिंपल सा मतलब यह है कि अब इंडियन मार्केट में प्रोडक्ट मेक्सिको में पहले के मुकाबले काफी ज्यादा महंगे हो जाएंगे यह डिसीजंस ऐसे समय पर आया है जब दुनिया भर में ट्रेड पहले से ही काफी ज्यादा प्रेशर में है इंडिया और मेक्सिको के बीच में पिछले कुछ सालों में ट्रेड गो हुए थे इसलिए यह स्टेप काफी ज्यादा लोगों के लिए सरप्राइजिंग भी है एक्सपोर्टर्स बिजनेस ओनर्स और पॉलिसी मेकर्स सब इस डिसीजंस को लेकर काफी ज्यादा डरे हुए दिख रहे हैं।
टैरिफ होता क्या है और 50% का मतलब क्या निकलता है
दोस्तों टैरिफ एक तरह का टैक्स होता है जो कि कई कंट्रीज दूसरे कंट्रीज के प्रोडक्ट्स पर लगती है जब मैक्सिको 50 परसेंटेज लगता है तो इसका मतलब यह है कि अगर कोई भी इंडियन प्रोडक्ट मेक्सिको में ₹100 का पड़ता था तो अब वह ₹50 एक्स्ट्रा टैक्स पर होगा इससे फाइनल प्राइस जो निकलकर आएगी वह डेढ़ सौ रुपए हो जाएगी जब प्राइस इतनी ज्यादा बढ़ जाती है तो बीएस नेचरली सस्ता ऑप्शन ढूंढने लगता है इसी वजह से काफी ज्यादा भारी मात्रा में टैरिफ लगाना सीधा सेल और डिमांड कोइफेक्ट करता है खासकर उन प्रोडक्ट्स के लिए जो कि पहले से ही काफी ज्यादा प्राइस सेंसिटिव होते हैं।
इंडियन एक्सपोर्टर्स पर क्या इंपैक्ट पड़ेगा
तो दोस्तों इस डिसीजंस का सबसे पहले और सीधा असर इंडियन एक्सपोर्टर्स पर ही पड़ेगा जो की कंपनी मेक्सिको को ऑटो पार्ट्स स्टील आइटम्स केमिकल्स टेक्सटाइल्स या फिर मशीनरी एक्सपोर्ट करती है उनके ऑर्डर स्लो हो सकते हैं कई एक्सपोर्टर्स का प्रॉफिट मार्जिन पहले ही लिमिटेड होता था और 50% टैरिफ के बाद उनका बिजनेस सस्टेन करना थोड़ा सा मुश्किल हो सकता है कुछ कंपनी प्राइस ऑफ जॉब करने की कोशिश करेंगे लेकिन दोस्तों सबके लिए यह पॉसिबल नहीं हो पाएगा इस सिचुएशन में एक्सपोर्टर्स या तो उदय मार्केट को ढूंढेंगे या फिर प्रोडक्शंस को काफी ज्यादा काम करने पर मजबूर हो सकते हैं। Mexico Tariff : भारत मेक्सिको ट्रेड पर प्रेशर 50% का सीधा असर
मेक्सिको के बर्ड्स और मार्केट पर क्या असर होगा
सिर्फ इंडिया में ही नहीं मेक्सिको के बायर्स और कंज्यूमर्स पर भी इसका काफी ज्यादा असर देखने को मिलेगा जब इंडियन प्रोडक्ट्स महंगे हो जाएंगे तो मेक्सिको के इंपोर्टेंट दूसरे कंट्रीज जैसे कि वियतनाम चीन या फिर लोकल सप्लायर की तरफ शिफ्ट होने का प्रयास करेंगे इसी कंपीटीशनबढ़ेगा और भारत के ब्रांच की प्रसेंस काफी ज्यादा कमजोर हो सकती है कुछ केसेस में बायर्स प्राइस को बढ़ाने को एक्सेप्ट कर लेंगे अगर क्वालिटी यूनिक हुई तो लेकिन दोस्तों मास प्रोडक्ट्स के लिए यह काफी ज्यादा मुश्किल हो जाता है लंबे समय में मेक्सिको मार्केट में इंडियन प्रोडक्ट की विजिबिलिटी को कम कर सकती है।
इंडियन और मेक्सिको के ट्रेड रिलेशंस पर क्या इफेक्ट पड़ेगा
तो दोस्तों इंडियन और मेक्सिको के रिलेशंस अब तक काफी ज्यादा कोऑपरेटिव रहे हैं लेकिन इतना बड़ा टैरिफ नेचरली थोड़ा सा टेंशन बन ही देता है इंडिया से इशू को डिप्लोमेटिक लेवल पर रेस कर सकता है और नेगोशिएशंस के जरिए से सॉल्यूशन निकालने की कोशिश कर सकता है ऐसे कैसे इसमें कंट्रीज ऑफ के इंटरेस्ट डिडक्शंस या फिर से सिलेक्टिव एक्सटेंशंस पर बात करती है दोनों कंट्री स्टेट बोर्ड नहीं चाहती क्योंकि उस दोनों तरफ के बिज़नेस को काफी ज्यादा नुकसान होता है इसलिए फ्यूचर में कुछ मीटिंग्स का रोल काफी ज्यादा इंपॉर्टेंट होगा।
क्या इंडियन काउंटर टैरिफ लगा सकता है
तो दोस्तों थियोरेटिकल इंडिया के पास ऑप्शन होता है कि वह भी मेक्सिको से आने वाले कुछ प्रोडक्ट्स पर काउंटर टैरिफ लगाए लेकिन दोस्तों ऐसा कदम बहुत बार लास्ट ऑप्शन ही होता है गवर्नमेंट पहले सिचुएशंस को आराम से हैंडल करने का कोशिश करती है क्योंकि काउंटर टैरिफ से काफी ज्यादा समस्या और बढ़ सकती है अगर दोनों तरफ से टेरेस बनने लगेंगे तो ट्रेड काफी ज्यादा स्लो हो सकता है और लॉस काफी ज्यादा बड़े हो सकते हैं इसलिए भारत ज्यादा फोकस नेगोशिएशंस अल्टरनेटिव या फिर मार्केट और एक्सपोर्टर्स को सपोर्ट देने पर ही करेगा।
आप लोगों पर इसका इनडायरेक्ट असर क्या होगा
तो दोस्तों डायरेक्टली आप लोगों को शायद तुरंत फर्क नहीं महसूस हो लेकिन इनडायरेक्ट इसका इंपैक्ट जरूर आ सकता है अगर एक्सपोर्ट काम होते हैं तो कुछ सेक्टर में जॉब के प्रेशर्स भी बढ़ सकते हैं कंपनी कॉस्ट टिकट करने के लिए हायरिंग को स्लो कर सकती है या फिर एक्सपेंशन को रोक सकती है लॉन्ग टर्म में अगर ऐसे डिसीजंस ग्लोबल लेवल पर बढ़ते रहे तो प्रोडक्ट की प्राइस इस तो वर्ल्डवाइड बढ़ सकती है ट्रेड पॉलिसी के डिसीजंस के इफेक्ट धीरे-धीरे बड़ा इकोनामिक पहुंच सकते हैं।
आगे का रास्ता क्या हो सकता है
अब सबकी नजर इसी बात पर है कि इंडिया और मेक्सिको इस सिचुएशंस को कैसे हैंडल करेगा कम समय में एक्सपोर्टर्स के लिए टाइम तो काफी ज्यादा टू रह सकता है लेकिन लंबे समय में भारत को अपने एक्सपोर्ट बेस को और ज्यादा डायवर्सिफाई करना पड़ेगा न्यू मार्केट बेटर ट्रेड डील्स और कॉम्पिटेटिव प्राइसिंग फ्यूचर को सॉल्यूशन हो सकती है या डिसिशन एक रिमाइंडर की तरह ही है कि ग्लोबल ट्रेड में स्टेबिलिटी हमेशा गार्डन की नहीं होती है और कंट्रीज को हर सिचुएशंस के लिए हमेशा तैयार रहना पड़ता है।
गवर्नमेंट का सपोर्ट और पॉसिबल रिलीफ कदम
दोस्तों ऐसी सिचुएशन में गवर्नमेंट का रूल काफी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है इंडियन गवर्नमेंट एक्सपोर्टर्स के साथ बैठकर सॉल्यूशंस को निकाल सकती है जैसे कि ट्रेड को फैसिलिटेशन इनसेंसेटिव स्किंस या फिर न्यू मार्केट का एक्सेस सपोर्ट कुछ सेक्टर के लिए शॉर्ट टर्म रिलीफ या फिर पॉलिसी सपोर्ट दिया जा सकता है ताकि एक्सपोर्टर सरवाइव कर सके गवर्नमेंट डिप्लोमेटिक चैनल के थ्रू ही मेक्सिको से बात करके सिलेक्टिव प्रोडक्ट पर तारीफ काम करवाने की कोशिश भी कर सकती है अगर टिमली सपोर्ट मिला तो एक्सपोर्टर्स के लॉसेस को काफी आहत तक कंट्रोल कर जा सकता है।
निष्कर्ष
मेक्सिको के 50% टैरिफ के फैसले ने भारत के एक्सपोर्ट सेक्शंस के लिए एक क्लियर वार्निंग सिग्नल दिया है इस डिसीजंस ने इंडियन एक्सपोर्टर्स खासकर एसएमएस पर शॉर्ट टर्म में प्रेशर बढ़ेगा और मेक्सिको मार्केट में इंडियन प्रोडक्ट्स की कंपीटिशन काफी ज्यादा काम हो सकती है साथ ही में वायरस के ऑप्शंस बदलने से डिमांड पर भी काफी ज्यादा असर पड़ेगा लेकिन लंबे समय में यह सिचुएशन भारत के लिए एक मौका भी हो सकती है जहां पर एक्सपोर्टर्स अपने मार्केट को डायवर्सिफाई करें कॉस्ट कंट्रोल पर फोकस करें और गवर्नमेंट के साथ मिलकर बैठे ट्रेड का सॉल्यूशन निकले