ईरान की मुद्रा रियाल की हालत लगातार खराब होती जा रही है। डॉलर के मुकाबले इसकी कीमत इतनी गिर चुकी है कि आम लोगों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी चलाना मुश्किल हो गया है। खाने पीने का सामान, दवाइयां, किराया और ईंधन जैसी जरूरी चीजें पहले से कहीं ज्यादा महंगी हो गई हैं। लोगों की कमाई वही है, लेकिन खर्च तेजी से बढ़ रहा है। कई परिवारों की बचत खत्म हो चुकी है और लोग भविष्य को लेकर डरे हुए हैं। बाजार में कीमतें हर दिन बदल रही हैं, जिससे लोगों को भरोसा ही नहीं रहता कि कल क्या हाल होगा।
छात्रों ने सड़कों पर उतरकर क्यों जताया विरोध
इस हालात का सबसे ज्यादा असर छात्रों पर भी पड़ रहा है। पढ़ाई का खर्च, किताबें, रहने का किराया और रोजमर्रा का खर्च सब कुछ बढ़ गया है। कई छात्रों ने कहा कि उनके परिवार अब पढ़ाई का खर्च उठाने में असमर्थ होते जा रहे हैं। इसी वजह से ईरान के कई शहरों में छात्र सड़कों पर उतर आए। उन्होंने प्रदर्शन किए, नारे लगाए और सरकार से मांग की कि महंगाई को काबू में लाया जाए। छात्रों का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो उनका भविष्य अंधेरे में चला जाएगा।
महंगाई और बेरोजगारी ने युवाओं को तोड़ा
रियाल की गिरावट सिर्फ चीजों को महंगा ही नहीं बना रही, बल्कि नौकरियों पर भी असर डाल रही है। कई कंपनियां बंद हो रही हैं या कर्मचारियों की संख्या घटा रही हैं। पढ़े लिखे युवाओं को भी काम नहीं मिल पा रहा। जो काम कर रहे हैं, उनकी तनख्वाह से घर चलाना मुश्किल हो गया है। युवाओं में गुस्सा और निराशा दोनों बढ़ रहे हैं। छात्रों का यह विरोध उसी गुस्से का नतीजा है, जो लंबे समय से अंदर ही अंदर जमा हो रहा था।
ईरान की अर्थव्यवस्था क्यों दबाव में है
ईरान की आर्थिक हालत लंबे समय से कमजोर बनी हुई है। विदेशी प्रतिबंधों की वजह से देश का कारोबार प्रभावित हुआ है। तेल की बिक्री, विदेशी निवेश और व्यापार सब पर असर पड़ा है। डॉलर की मांग बढ़ती जा रही है और रियाल कमजोर होता जा रहा है। सरकार ने कुछ कदम उठाने की कोशिश की है, लेकिन उनका असर आम लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा। यही वजह है कि हालात दिन पर दिन बिगड़ते जा रहे हैं।
सरकार की बातों पर क्यों नहीं हो रहा भरोसा
सरकार का कहना है कि वह हालात सुधारने के लिए काम कर रही है और जल्द राहत मिलेगी। लेकिन आम लोगों और छात्रों को अब सिर्फ बयान सुनकर भरोसा नहीं हो रहा। लोग चाहते हैं कि महंगाई कम हो, नौकरी के मौके बढ़ें और रियाल को संभालने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि अगर जल्द बदलाव नहीं हुआ तो विरोध और बढ़ सकता है।
डॉलर क्यों मजबूत होता जा रहा है
डॉलर के मजबूत होने की एक बड़ी वजह यह है कि दुनिया के कई देश अभी भी डॉलर को सबसे सुरक्षित मुद्रा मानते हैं। जब भी किसी देश की अर्थव्यवस्था में दिक्कत आती है, लोग अपनी बचत डॉलर में रखना चाहते हैं। ईरान में जैसे ही हालात बिगड़े, लोगों ने भी डॉलर खरीदना शुरू कर दिया। इससे डॉलर की मांग बढ़ गई और रियाल और कमजोर होता चला गया। जब ज्यादा लोग डॉलर चाहते हैं और रियाल से दूरी बनाते हैं, तो रियाल की कीमत और गिर जाती है। यही चक्र बार बार दोहराया जा रहा है।
छोटे कारोबारियों पर क्या असर पड़ा
रियाल की गिरावट का असर सिर्फ छात्रों या नौकरीपेशा लोगों तक सीमित नहीं है। छोटे दुकानदार और कारोबारी भी मुश्किल में हैं। बाहर से आने वाला सामान बहुत महंगा हो गया है, जिससे उनकी लागत बढ़ गई है। लेकिन वे ग्राहकों से ज्यादा कीमत भी नहीं ले पा रहे, क्योंकि लोगों की खरीदने की ताकत कम हो गई है। कई दुकानदारों ने अपना काम छोटा कर दिया है और कुछ ने दुकानें बंद तक कर दी हैं। इससे बेरोजगारी और बढ़ने का खतरा भी सामने आ रहा है। डॉलर के सामने रियाल बुरी तरह गिरा, ईरान में छात्रों का गुस्सा सड़कों पर दिखा
सोशल मीडिया पर गुस्सा और डर
ईरान में सोशल मीडिया पर भी लोग खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। लोग लिख रहे हैं कि रियाल की गिरावट ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी है। कई लोग अपने खर्च, किराया और दवाइयों की कीमतों को लेकर चिंता जता रहे हैं। छात्रों के प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो तेजी से फैल रहे हैं, जिससे गुस्सा और डर दोनों बढ़ रहे हैं। सोशल मीडिया अब लोगों की आवाज बनने लगा है, जहां वे सरकार से जवाब मांग रहे हैं।
आने वाले दिनों में हालात किस ओर जा सकते हैं
अगर रियाल की गिरावट ऐसे ही जारी रही, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। महंगाई और बढ़ेगी, नौकरियां और कम होंगी और विरोध प्रदर्शन तेज हो सकते हैं। सरकार के सामने बड़ी चुनौती है कि वह लोगों का भरोसा कैसे वापस लाए। अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो देश में अस्थिरता बढ़ सकती है। आने वाले कुछ हफ्ते यह तय करेंगे कि हालात संभलते हैं या और बिगड़ते हैं।
निष्कर्ष
डॉलर के मुकाबले रियाल की गिरावट ने ईरान को गहरी परेशानी में डाल दिया है। छात्रों का सड़कों पर उतरना इस बात का साफ संकेत है कि हालात अब लोगों की सहन सीमा से बाहर होते जा रहे हैं। अगर जल्द सुधार नहीं किया गया, तो यह गुस्सा सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश में फैल सकता है। आने वाले दिनों में सरकार क्या कदम उठाती है, इस पर सभी की नजर टिकी हुई है।